New Delhi नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली स्थित स्पेशल सेंटर फॉर डिजास्टर रिसर्च (SCDR) में “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल परिवर्तन के युग में उच्च शिक्षा की पुनर्कल्पना: शिक्षण, शोध, प्रशासन एवं संस्थागत परिवर्तन” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन SAFL India Foundation द्वारा SCDR, JNU के सहयोग से किया गया। यह सम्मेलन केवल एक अकादमिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि शिक्षा, तकनीक और समाज के बदलते संबंधों पर गंभीर संवाद का एक जीवंत मंच बनकर उभरा।
देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं ने सम्मेलन में भाग लिया। पूरे दिन चले इस आयोजन में इस बात पर व्यापक चर्चा हुई कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीकें किस प्रकार उच्च शिक्षा, शिक्षण पद्धतियों, शोध, प्रशासन और संस्थागत संरचनाओं को प्रभावित कर रही हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. एस. श्रीकेश, अध्यक्ष, स्पेशल सेंटर फॉर डिजास्टर रिसर्च, जेएनयू ने की। उन्होंने कहा कि तकनीक को केवल सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों के साथ जोड़कर देखने की आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि प्रो. कौशल किशोर, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशनल स्टडीज़, जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने डिजिटल शिक्षा और बदलती शिक्षण पद्धतियों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भविष्य की शिक्षा को अधिक समावेशी, संवेदनशील और संवादपरक बनाने की आवश्यकता है।
Neev AI के संस्थापक श्री अर्जुन सिंह बेदी ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शिक्षा जगत में अभूतपूर्व परिवर्तन ला सकती है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है कि तकनीकी विकास मानवीय संवेदनाओं, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ा रहे।
दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. क्षितिज कुमार सिंह ने AI से जुड़े कानूनी और नैतिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए डेटा गोपनीयता, डिजिटल प्रशासन और अकादमिक ईमानदारी जैसे विषयों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
सम्मेलन के अंतर्गत “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उच्च शिक्षा का भविष्य: प्रशासन, नवाचार एवं समावेशन” विषय पर एक विशेष प्लेनरी सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने की तथा सह-अध्यक्षता डॉ. अभिजीत द्विवेदी ने की। सत्र में श्री कार्तिक शर्मा, डॉ. मीनाक्षी तोमर सहित कई वक्ताओं ने AI आधारित शिक्षा, डिजिटल समावेशन, नीतिगत सुधार और तकनीक-संचालित शिक्षण वातावरण पर अपने विचार रखे। डॉ. उज्ज्वल नारायण ने भी उच्च शिक्षा में AI की सकारात्मक भूमिका और समावेशी शैक्षणिक विकास पर विशेष बल दिया।
सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों और शिक्षकों ने AI आधारित शिक्षण, डिजिटल ज्ञान प्रणाली, सामाजिक न्याय, मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक नैतिकता और उच्च शिक्षा के भविष्य जैसे विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए। इन चर्चाओं ने यह स्पष्ट किया कि तकनीक और शिक्षा का संबंध केवल डिजिटल बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
सम्मेलन के संयोजक श्री जगदीश बिश्नोई ने कहा कि आज आवश्यकता केवल तकनीकी दक्षता की नहीं, बल्कि ऐसे शिक्षण ढांचे की है जो विद्यार्थियों में नैतिक नेतृत्व, सामाजिक संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक सोच विकसित कर सके।
वहीं SAFL India Foundation के निदेशक एवं सह-संयोजक श्री लव कुमार सिंह ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षा, समाज और तकनीक के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि भविष्य की उच्च शिक्षा वही होगी जो नवाचार के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, समावेशन और आलोचनात्मक चिंतन को भी महत्व दे।
समापन सत्र में पूर्व डीजीपी मेघालय एवं एसडीजीपी असम डॉ. एल.आर. बिश्नोई मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. रवि शेखर, प्रोफेसर, CSRD, जेएनयू ने भी अपने विचार साझा किए। सम्मेलन का समापन धन्यवाद ज्ञापन, प्रमाण-पत्र वितरण और भविष्य में अधिक समावेशी, नैतिक एवं मानवीय शिक्षा व्यवस्था के संकल्प के साथ हुआ।
