राष्ट्र सेविका समिति, उत्तर क्षेत्र प्रबोध वर्ग, समापन समारोह 

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नई दिल्ली. राष्ट्र सेविका समिति उत्तर क्षेत्र (हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू, कश्मीर, दिल्ली) का आज 15 दिवसीय शिक्षा वर्ग- प्रबोध जो 6 जून, 2026 से आरंभ हुआ का आज 21 जून को समापन समारोह संपन्न हुआ l इस वर्ग में उत्तर क्षेत्र (पांच प्रांतों) से 84 शिक्षार्थी व कुल संख्या 143 सेविकाएं सम्मलित हुईं .

प्रबोध वर्ग की सेविकाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका वंदनीय शांताक्का जी ने कहा कि परिवार समाज की धुरी है। महिलाओं व समाज के नागरिकों में अगर कर्तव्य बोध होगा तभी समाज की उन्नति संभव होगी। धर्म आधारित जीवन ही समाज को दिशा दे सकता है जिसका आधार पुरुषार्थ हो तथा माता संकल्प लेकर श्रेष्ठ संतान को जन्म दे तथा उसे समाज के लिए सुसंस्कारित व कर्तव्यनिष्ठ बनाएं। उन्होंने विवेकानंद, बाल गंगाधर तिलक, शिवाजी की माताओं का उदाहरण देकर अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत मां की मुक्ति के लिए संतान की चाह इन माताओं ने की और उनमें श्रेष्ठ विचारों की स्थापना भी की। यह महान विचार एक मां के ही हो सकते हैं जो अपनी संतान को राष्ट्र के लिए समर्पित कर दे। हमारे समाज में ऐसे आदर्श उपस्थित हैं जहां मां परिवार के लिए, संतान के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करती है। जिस परिवार में विघटन होगा वह समाज अवनति की ओर अग्रसर होगा।

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आज समाज को गुणात्मक शाखा की आवश्यकता है, कार्य विस्तार की आवश्यकता है और समाज की सज्जन शक्तियों को एकत्रित एवं संगठित करने की आवश्यकता है इस कार्य को राष्ट्र सेविका समिति वर्त्तमान में महिलाओं के बीच में विगत 90 वर्षों से कर रही है l

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कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर श्रुति त्रिपाठी (व्यवसाय, वित्त और प्रबंधकीय कौशल संकाय डी.एन. ई.यू. दिल्ली) ने सेविकाओं को राष्ट्र कार्य में निरंतर बढ़ते रहने की तथा आत्मरक्षा व आत्म बल की प्रेरणा दी।

इस अवसर पर वर्गाधिकारी निधि शर्मा ने बताया कि राष्ट्र सेविका समिति के प्रबोध वर्ग में लगभग 143 बालिकाएं, किशोरियां और महिलाओं ने 15 दिन के प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया। 6 जून,2026 को जब शिक्षार्थी बहनें प्रबोध वर्ग में आईं थीं तो उन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि यहां उनका शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास एक साथ संभव होगाI पंद्रह दिन यहां रहकर उन्होंने अपने देश की महान संस्कृति व देश की महान विभूतियों के बारे में भी जानकारियां प्राप्त कीं हैं I सुनीता भाटिया दिल्ली प्रांत कार्यवाहिका ने भी प्रवेश व प्रबोध वर्गों के महत्व पर बल दिया।

प्रबोध वर्ग में 14 वर्ष से लेकर लगभग 55 वर्ष तक की महिलाओं ने भागीदारी की। यहां एक साथ रहकर उन्होंने सामाजिक समरसता,आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा और आत्म स्वाभिमान जैसे गुण सीखेंI इस वर्ग से जो युवतियां निकलेंगी यह तय है कि वे अपनी रक्षा स्वयं कर सकेंगी I यह प्रबोध वर्ग बालिकाओं और महिलाओं के जीवन को नयी दिशा देते हैं I छोटी बालिकाओं के मन मस्तिष्क में जो बीज बो दिया जाता है वही उनकी जीवन यात्रा का मजबूत आधार बनता है I वे यह सीखकर जाती हैं कि जीवन केवल अपने लिए नहीं होता बल्कि वह समाज और देश के लिए भी होता है I

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वर्ग में बालिकाओं ने नियुद्ध, (जूडो-कराटे), योग, दंड प्रहार, योगासन, यष्टी के सुन्दर प्रदर्शन से सभी को हर्षित कर दिया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती आरती सहगल (प्रसिद्ध औद्योगिका) जी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का भविष्य उज्जवल है तथा देश की बागडोर प्रतिभाशाली महिलाओं के हाथ में है। हम अपने जीवन में स्वप्न देखें और उन्हें पूरा करने के लिए मुश्किलों के सामने न झुकें। आत्मविश्वास से ही सफलता मिलती है तथा समाज में कार्य करने के साथ साथ अपनी संस्कृति से जुड़ा रहना आवश्यक है l

उत्तर क्षेत्र कार्यवाहिका चंद्रकांता जी, उत्तर क्षेत्र व्यवस्था प्रमुख सुरेंद्रा जी,

सुनीता भाटिया (दिल्ली प्रांत कार्यवाहिका), विजया शर्मा (उत्तर क्षेत्र प्रचारिका व अखिल भारतीय महाविद्यालयीन तरुणी प्रमुख) , प्रतिभा बिष्ट (दिल्ली प्रांत सह कार्यवाहिका) , अधिकारीगण, सेविका बहनें और अभिभावक गण के साथ बड़ी संख्या में सम्मानित नागरिक उपस्थित रहे। मंच संचालन दिल्ली प्रांत बौद्धिक प्रमुख सरिता आनंद जी ने किया तथा निधि शर्मा जी ने वर्ग विवरण प्रस्तुत किया। वर्ग कार्यवाहिका प्रतिभा बिष्ट जी ने समिति परिचय दिया।

वर्तमान में पूरे देश भर में 4 लाख सेविकाएं हैं तथा 4125 शाखाएं चल रही है तथा 45 पूर्णकालिक प्रचारिकाएं हैं । इसके साथ 100 विस्तारिकाएं समिति कार्य को विस्तार देने में संलग्न हैं।

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