जयराम महतो के पार्टी के सभी के सभी प्रत्याशी का ज़मानत ज़ब्त होगा

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Press release  by immam safi  जैसा की सभी जानते हैं दिसंबर 2021 को हेमंत सरकार द्वारा एक विज्ञप्ति जारी कर नियुक्ति में बोकारो, धनबाद जिला में भोजपुरी , मगही व मैथिली भाषा को अनिवार्य कर दिया, जिसके विरुद्ध 25 दिसम्बर को बोकारो के बिरसा मुंडा चोक (नया मोड़) से कुछ स्थानीय युवाओं ने जिसमें, सोहराय हासद, इमाम सफी, तीर्थनात आकाश, राजेश महतो, राजेश ओझा, गुलाम हुसैन, हलधर महतो,अरविंद राजपूत, दयामय बानुआर, घनश्याम महतो व अन्य ने सरकार के विरुद्ध विगुल फूंक दिया।‌ जो देखते ही देखते आग की तरह संपूर्ण झारखंड में फैल गया।

कुछ समय बाद झारखंडी भाषा संघर्ष समिति का गठन हुआ और इस बैनर तले हर क्षेत्र में स्वत:स्फूर्त आन्दोलन होने लगा। इस समय सभी लोग निस्वार्थ भाव से भाषा व खतियान मुद्दे पर लड़ा जा रहा था लेकिन कुछ महीने बाद ही आन्दोलन में जयराम नामक ग्रहण लग गया। निजी स्वार्थ से प्रेरित जिला परिषद की तैयारी कर रहे महात्वाकांक्षी युवक ने भीड़ में झूठ और चिकनी चुपड़ी बाते करके आन्दोलन को हाईजैक करना शुरू कर दिया।

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पढ़ने वाले बच्चे व यूट्यूबर की मदद से हमेशा सुर्खियों में रहना, इसके लिए तरह तरह के हथकंडा अपना शुरू कर दिया। बैठक,सभा ,रैली, मानव श्रृंखला में नित नए-नए जुगाड़ बैठाना, झूठ व विवादित बोली धीरे-धीरे बेरोजगार युवाओं को आकर्षित करना उसका दिनचर्या बन गया। कुछ फेमस होने के बाद पुराने साथियों को छोड़ कर नया संगठन बना‌ लिया। इस प्रकार मुद्दा आधारित भाषा खतियान आन्दोलन मुद्दा विहीन व्यक्तिगत आन्दोलन में बदल गया।* ‌

‌*बाद‌ में कुछ सहजाति सामाजिक आंदोलनकारी से संपर्क हुआ और उनका सहयोग मिलने लगा, सभा की दौर चालू हो गया। इस प्रकार निजी महात्वाकांक्षा से झारखंड के बहुत से युवाओं का पढ़ाई चौपट हो गया, केरियर बर्बाद हो गया। अब तो खुलेआम कह रहा है वोट दो और एक बेटा भी दो ,वोट की राजनीति में असफल होंगे तो राज्य में क्या होगा कोई मायने नहीं रखता कोयलांचल में अंदर खाने एक सेना बनाएंगे और राज्य भुगतेगा। अब तो यह हालत है सच बोलो तो उसके गेंग से तरह-तरह की धमकी आने लगा है।*

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*‌मैं तो झारखंड की जनता से अपील ही कर सकता हूं ऐसे बहुरुपिए और धूर्त लोग से राज्य को बचा लीजीए। अगर मुकदर्शक बने रहे तो बहुत जल्द झारखंड जंगल राज बन जाएगा। ऐसे लोग का हर जगह से जमानत जब्त होना चाहिए।* *आन्दोलनकारी इमाम सफी।*

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Ojha Rajesh Purohit

Senior Journalist

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