सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बताया विरोधाभास, ऐसा कैसे हो सकता

0 minutes, 0 seconds Read

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए विरोध विरोधाभासी बताया है। हाईकोर्ट के पिछले साल मई महीने में दिए गए फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश गंगस्टर और सामाजिक गतिविधि अधिनियम 1986 के नियमों के तहत सहारनपुर जिले में एक दर्ज मामले में 5 आरोपियों द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

आवेदन खारिज होने के बाद आवेदकों ने वकील हाईकोर्ट के समक्ष प्रार्थना की थी कि उन्हें मुक्त किए जाने के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता दी जाए और इसके निस्तारण तक आरोपित के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई ना की जाए।

Whatsapp Group
See also  TMC ने जारी किया लोकसभा उम्मीदवारों की सूची, क्रिकेटर यूसुफ पठान व कीर्ति आजाद होंगे TMC के प्रत्याशी

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश देखकर सुप्रीम कोर्ट आश्चर्यचकित है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में इस अनुरोध को अनुमति प्रदान की कोर्ट में  को 2 महीने की अवधि के लिए दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया।

हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बी आर गड़वाई और जस्टिस जे बी परदीवाला की पीठ ने सुनवाई की। पीठ ने 18 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि हम इलाहाबाद हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश को देखकर चकित हैं।

See also  EDअधिकारियों पर हमला, हाईकोर्ट में 6 मार्च को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के समाचार पत्रों द्वारा दायर आवेदन राय सरकार के वकील के इस आधार पर पुरजोर विरोध किया था कि आरोपितों को अपराधिक इतिहास और उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया किए गए हैं। पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश के उस हिस्से को रद्द कर दिया जिसमें निर्देश दिया गया कि इन आरोपितों के खिलाफ 2 महीने तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

 

Share this…

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *