झारखंड युवाओं की हालत रोजगार नहीं, नियोजन नीति की मांग करने पर मजबूर

0 minutes, 3 seconds Read

रांची झारखंड राज वैसे तो खनिज संपदा से भरा हुआ है। झारखंड राज्य का निर्माण इसलिए किया गया था कि झारखंड के युवक अल्पसंख्यक आदिवासी समाज को यहां के युवाओं को उत्थान हो सके।

हालत यह हो गई है कि झारखंड के युवा की बेरोजगार स्थिति बद से बदतर हो गया है। सरकार की नीतियां झारखंड के युवाओं के हक में आज तक नहीं बन पाया है।

Whatsapp Group

जब से झारखंड राज्य का निर्माण हुआ है यहां पर गिने-चुने को छोड़कर सारी परीक्षाएं कोर्ट कचहरी धांधली में फस गया।

यहां के गरीब शोषित आदिवासी अभ्यर्थी का चयन उनके टैलेंट के हिसाब से ना होकर कचहरी धांधली सेटिंग से सरकारी जॉब हुआ।

नौकरी चयन ग्रुप ए ग्रेड से लेकर ग्रुप डी ग्रेड पारदर्शिता नहीं हुआ है। ऐसा यहां के बेरोजगार अभ्यार्थी  कहते हैं।

See also  पुलिस को होगी जेल, पत्रकारों के साथ बदसलूकी करने पर, नहीं मिलेगी बेल

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग JSSC या JPSC द्वारा समय पर परीक्षा ना लेना का मुख्य कारण झारखंड सरकार की नीतियां होती है।

कोर्ट कचहरी में फस जाने से युवाओं के साथ हमेशा धोखा होता है। राज्य के मंत्री नेता विधायक हमेशा ऐसा ऐसा बयान देते हैं कि यहां के युवाओं को अब  मजबूरन रोजगार की मांग ना कर , नीति बनाने को लेकर आंदोलन करना पड़ रहा है।

हेमंत सरकार के द्वारा 2021 में नियोजन नीति जो बनाई गई थी उसे जब से हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया युवा हताश और बेहाल हो गए हैं।

रोजगार को छोड़ अब नियोजन नीति पर जोर दे रहे हैं कि सरकार नियोजन नीति बनाए , सरकार को रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि कोर्ट ना जाए, पहले आप नियोजन नीति बनाएं उसके बाद अब रोजगार की वैकेंसी करें।

See also  जननायक कॉमरेड महेंद्र सिंह के 19 वें शहादत दिवस मनाया गया

JPSC की के अधिकांश परीक्षाएं कोर्ट कचहरी  पड़ा हुआ है । यहां तक कि झारखंड बनने के बाद पहली बार जेपीएससी या दूसरी बार की JPSC हो सीबीआई के द्वारा जांच किया जा रहा है।

प्रथम jpsc का जांच भी पूरा नहीं हुआ है और बहुत से अधिकारी रिटायरमेंट की कगार पर हैं या रिटायर हो गए हैं यही तो हाल है झारखंड राज्य का।

Share this…

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *