नई दिल्ली। राम लाल महाविद्यालय में आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम में विद्यार्थीयों को उनकी प्रतिभा पहचनाने और उसे सही दिशा में अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया गया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर अवधेश प्रधान जी रहे जो काशी हिंदू विश्व विद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व प्रोफेसर और देश के बेहद प्रतिष्ठित का मुर्धनय आलोचक है|
प्रो• प्रधान जी ने अभिव्यक्ति सोसाइटी के नाम की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर प्रतिभा और शक्ति पहल से ही मौजुद होती है| जब यह प्रतिभा अपने भीतर से बाहर आकार समाज के सामने दिखती है तो उसे अभिव्यक्ति कहा जाता है| उन्होने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी प्रतिभा को पहचानें और उसका साकारात्मक उपयोग करते हुये, अपने भविष्य, परिवार और समाज को बेहतर बनाने में योगदान दें|
अंत में उन्होने स्वामी विवेकानन्द और सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की रचना- धर्मिकता पर बात की जिसमें उन्होंने कहा कि विवेकानन्द का सन्देश केवल धार्मिक विचार तब तक सिमित नहीं था, बल्की उसमें मानवता, समानता और आपसी सम्मान की भावना भी थी| उन्होंने स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस के संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त नहीं है, ज्ञान तभी सार्थक होता है जब वह व्यक्ति के व्यवहार और जीवन में दिखाई दे|
उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि जीवन में आने वाले चुनौतियों डटकर का सामना करना चाहिए| उनके अनुसार सफलता के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति, आत्मविश्वास और लगातार प्रयास आवश्यक है|
रिपोर्ट: खुशबू
